हिमालय से ऊँचा साहस – मीनाक्षी

हिमालय से ऊँचा साहस

हिमालय से ऊँचा साहस

अपनी निजी सुरक्षा की कतई परवाह न करना , दुश्मन की गोलियों के सामने लगातार बहादुरी भरा कार्य करना ; एक ऐसा शानदार काम है जो न सिर्फ़ उसकी यूनिट अपितु पूरे राष्ट्र  के लिए गर्व का विषय है |

कश्मीर के द्राक्ष क्षेत्र में ‘ टाइगर हिल ‘ सबसे महत्वपूर्ण चोटी है | इससे आकर्षित होकर पाकिस्तानियों ने इस पर मज़बूती से कब्ज़ा कर रखा था | यहाँ से वे राष्ट्रीय राजमार्ग – १ ए पर प्रभावी रूप से गोलाबारी कर रहे थे | इस इलाके से पाकिस्तानियों को शीघ्र खदेड़ना बहुत ही आवश्यक था |

३ जुलाई १९९९ के दिन ‘ लेफ़्टिनेंट बलवान सिंह ‘ और उनकी घातक प्लाटून को टाइगर हिल पर कब्ज़े की जिम्मेदारी सौंपी गई थी | लक्ष्य तक पहुँचने के लिए 16500 फुट की ऊँचाई पर चढ़ना था | पहाड़ी का रास्ता सीधी चढ़ाई वाला, बर्फीला और पथरीला था | उन्होंने खतरे की परवाह न करते हुए अपने आपको इस काम के लिए आगे किया और चट्टानों में रस्सी फँसाकर चढ़ना आरम्भ कर दिया | उन्हें आते देख दुश्मन ने गोलाबारी तेज़ कर दी लेकिन लेफ़्टिनेंट बलवान सिंह में लड़ाई का जुनून इस कदर था कि वे दुश्मन की  गोलियों की परवाह न करते हुए चोटी पर चढ़ते चले गए |

लेफ़्टिनेंट बलवान सिंह मात्र तीन महीनों के सैन्य अनुभव के बावजूद इस कठिन जिम्मेदारी को निभाने के लिए दृढ़संकल्प थे | उनके नेतृत्व और प्रेरणा के दम पर उनका दल १२ घंटे तक दुश्मन के तोपखाने द्वारा की गई भारी गोलाबारी के बीच रेंगता हुआ लक्ष्य की ओर बढ़ता रहा और अंत में एक निर्धारित स्थान तक पहुँच गया | उनकी इस कार्यवाही से दुश्मन दांग रह गया | क्योंकि इन्होंने पहाड़ी पर चढ़ने के लिए वह हिस्सा चुना था जो की बहुत दुर्गम था | दुश्मन को घातकों के वहाँ से चढ़कर आने की बिलकुल भी उम्मीद नहीं थी | चढ़ाई के समय गोपनीयता बनाए रखी गई |

घातकों को सामने पाकर दुश्मन घबरा गया | वह घातकों को पीछे हटाने में असफ़ल रहा | इस कार्यवाही में  लेफ़्टिनेंट बलवान सिंह बुरी तरह घायल हो गए | हालांकि उनके ज़ख्मों से तेज़ी से रक्त बह रहा था , दुश्मन के खातमे का  दृढ़निश्चय कर लेफ़्टिनेंट बलवान सिंह ज़रा भी विचलित नहीं हुए | अपने ज़ख्मों की परवाह न करते हुए तेज़ी से आगे बढ़े और दुश्मन को घेर कर उनसे उलझ गए ; दुश्मन इनको ज़िंदा पकड़ना चाहता था | होथों-हाथ की लड़ाई में इन्होंने अकेले ही चार दुश्मनों को मौत के घाट उतार दिया | दुश्मन के सैनिकों ने इस अधिकारी के आक्रोश का सामना करने के बजाय जान बचाकर भागना ही उचित समझा |

इस प्रकार इनके प्रेरणादायक नेतृत्व , उत्कृष्ट साहस और बहादुरी से ‘ टाइगर हिल ‘ पर भारतीय सैन्य टुकड़ी ( १८ ग्रेनेडियर्स ) ने ४ जुलाई को तिरंगा फहराकर अपना कब्ज़ा कर लिया | इनका साहसिक कृतित्व अनुकरणीय था | इनको राष्ट्रपति महामहिम श्री के.आर. नारायणन के द्वारा ‘ महावीर – चक्र ‘ से सम्मानित किया गया |

युद्ध में सैनिकों की संख्या नहीं अपितु उनकी इच्छा-शक्ति युद्ध का फैसला करती है | यही कार्य लेफ़्टिनेंट बलवान सिंह ने किया | आज कल वे १८ ग्रेनेडियर्स को कमांड कर रहे हैं |

शिक्षा – मुसीबत के समय बुद्धि , धैर्य और दृढ़संकल्प से काम लेने वालों की हमेशा जीत होती है |

  मीनाक्षी

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